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NepaliVivah stand on Privacy

We have always believed in the principles of privacy. We are committed preserve member privacy.

Internet companies collect a lot of data – often very personal information. Although we connect data on members to help them find a partner, we believe that the data belongs to the members. As such, we do not allow various search engines to crawl our member’s profiles and display in search results.

How often have you found someone you are searching for in a matrimony website? Most people have found several of their friends.

We understand that the phase of getting married is very exciting. However, we still don’t let our members’ profiles to be open accessible.  As a result, our members can be assured that strangers are not just checking their profiles out for fun. We are committed to seriousness.

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Diversity in Unity and Unity in Diversity is natural element of religion

केवल आदमी ही नही प्रतेक प्राणी के चिन्तन और चाहत मे भिन्नता और पूरी प्रक्रिती मे विशमता है , वैचारिक स्वतन्त्रता प्राकृतिक है । इसी लिये मानव समाज मे धर्म और सन्सकारो मे भिन्नताये है । इस् लिये पूरा संसार एक ही धार्मिक झन्डे के नीचे आ ही नही सकता है, रह ही नही सकता है और रहना भी नही चाहिये क्योकी यह तो अप्राकृतिक होगा। इश्वर एक है उसके नाम और रुप आदमियो ने अपनी चाहना के अनुसार निर्मित किये है और उस इश्वर तक पहुचने के लिये धर्म और सम्प्रदाय् बनाये गये है । इस लिये सभी धर्म अच्छे हैऔर एक ही मन्जिल तक पहुचने के लिये अलग अलग प्रक्रिती के आदमियो कि चाहना और सुविधा के अलग अलग रास्ते भर है । रास्ते के बारे मे विवाद करनआ मूर्खता होती है । विवाद से इश्वर की ओर जाने का रास्ता छूट जाता है और हम पशुत्व के रास्ते पर चले जाते है । धार्मिक विविधता समाज का अनिवार्य तत्व है । पर स्मर्णीय यह है कि धर्म की नीव सदाचार और सेवा पर टिकी होनी चाहिये । धर्म मे स्वार्थ और हिन्सा को कोइ स्थान नही होता है, अगर ऐसा कुछ है तो वह इश्वर कि ओर ले जाने का रास्ता नही हो सकता है। ऐसा रास्ता तो हमारी मन और इन्द्रियो के भोग लिप्सा कि उपज भर होती है । इज लिये जो जिस रास्ते पर जाना चाहे, उसे जाने दो। सभी लोग मिल्जुल कर रहो। एकता मे विविधता बनी रहने दो । कल्याण का यही रास्ता है ।यह धर्म का अङ है ।

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Marriage is a important Sansakar in Nepali Religion and Culture

नेपाली धर्म र सन्सक्रिती मा विवाह् एक महत्वपूर्ण र मर्यादित सन्सकार हो। नेपाली सन्सक्रिती मा त मानिस् को मात्र विवाह् होइन रूख बिरुवा हरु को र इनार को पनि विवाह् गरिने पद्धती रही आएको छ्। वर पीपल को आपस मा विवाह् हुने गरेको छ् भने नयाँ बगैचा तयार भये पछी इनार खनाएर इनार र बगैचा को विवाह् हुने गर्दछ। यस्तै नयाँ शिव मन्दिर बनाये पछी नयाँ मन्दिर र अर्को कुनै विवाहित शिव मन्दिर सँग विवाह् हुने गर्दछ। कार्तिक पुर्णिमा मा बिष्णु र तुलसी को विवाह् हुन्छ भने मगसिर पञ्चमी मा भगवान राम र भगवती सिता को विवाह् हुन्छ।

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We must follow our culture

नेपाली सन्सकार मा विवाह एउटा मुख्य सन्सकार हो । कुनै नेपाली यदी त्यो बुद्धिमान त रहेछ तर सन्सकारीत छैन भने त्यो सामाजिक हुन सक्दैन ।यस कारण सामाजिकता को आधार सन्सकार हो। आज को युग मा रामरो, योग्य, र सुहाउदो वर वधु खोज्न एउटा ठुलो चुनौती रहेको समयमा अब यो लमी को शहारा लिना उपयुक्त हुन्छ.

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